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कैलाश मानसरोवर यात्रा 2016



पंजीकरण 2016  के लिए बंद है।
मार्ग : यात्रा के लिए दो भिन्न मार्ग हैं
मार्ग 1: लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड)-
मार्ग का मानचित्र देखने के लिए-क्लिक करें
जत्थों की संख्या : 18
यात्रा अवधि : लगभग 25 दिन
प्रति व्यक्ति अनुमानित व्यय : 1.6 लाख रुपये
प्रत्येक बैच का यात्रा कार्यक्रम विवरण-क्लिक करें
मार्ग 2: नाथुला दर्रा (सिक्किम)-
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जत्थों की संख्या : 07
यात्रा अवधि : लगभग 23 दिन
प्रति व्यक्ति अनुमानित व्यय : 2 लाख रुपये
प्रत्येक बैच का यात्रा कार्यक्रम विवरण-क्लिक करें

कैलाश मानसरोवर यात्रा प्रतिवर्ष विदेश मंत्रालय द्वारा जून से सितंबर तक दो भिन्नं मार्गों से आयोजित की जाती है- लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथुला (सिक्किम)। यह यात्रा अपने धार्मिक मूल्यों , सांस्कृतिक महत्व, भौतिक सौंदर्य तथा रोमांचक प्राकृतिक परिवेश के लिए प्रसिद्ध है। प्रति वर्ष सैकड़ों लोग इस यात्रा को करते हैं। भगवान शिव का निवास स्थल होने के कारण हिंदुओं के लिए इसका धार्मिक महत्व है; साथ ही यह जैनियों और बौद्धों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह यात्रा केवल भारतीय नागरिकों के लिए है जो धार्मिक उद्देश्य से यात्रा पर जाना चाहते हैं, जिसके लिए भारतीय पासपोर्ट अनिवार्य है। कैलाश मानसरोवर यात्रा को भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन द्वारा एक ट्रैकिंग अभियान के रूप में मान्यता दी गई है। विदेश मंत्रालय यात्रियों को किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता या कोई अनुदान राशि प्रदान नहीं करता है।

यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पूर्व तैयारी और चिकित्सीय परीक्षण के लिए 3-4 दिन दिल्ली में ठहरना होता है। दिल्ली सरकार निशुल्क भोजन एवं आवास की सुविधाएं केवल यात्रियों के लिए प्रदान करती है। तथापि, यात्री अपने भोजन एवं आवास की व्यवस्था करने के लिए स्वतंत्र हैं।

सलाह:चूंकि यह यात्रा अत्यधिक ठण्डे एवं बीहड़ इलाके सहित कई दुर्गम परिस्थितियों तथा 19,500 फीट तक की ऊंचाई के रास्ते से होकर गुजरती है जहां सीमित सुविधाएं हैं, इसलिए यह यात्रा शारीरिक एवं चिकित्सीय रूप से अस्वस्थ लोगों के लिए दुर्गम हो सकती है। प्राकृतिक आपदा या अन्य किसी कारण से यात्री की जीवन हानि के लिए, चोट लगने पर या व्यक्तिगत या संपत्ति की क्षति के लिए किसी भी रूप में भारत सरकार जिम्मेदार नहीं होगी। तीर्थयात्री अपनी लागत, जोखिम एवं परिणाम के लिए स्वयं उत्तरदायी हैं। यदि सीमा पार (चीन/तिब्बत) में किसी यात्री की मृत्यु हो जाती है तो भारत सरकार तीर्थयात्री का पार्थिव शरीर वापस लाने हेतु बाध्य नहीं है। इसलिए, मृत्यु के संदर्भ में चीनी क्षेत्र पर पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार करने के लिए सभी यात्रियों को सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करना आवश्यक है।

न्यायिक प्रक्रिया: कैलाश मानसरोवर यात्रा वेबसाइट की सामग्री पर किसी प्रतिकूल प्रभाव के बिना, सभी दावों, विवादों और मतभेदों को केवल दिल्ली स्‍थित अदालतों के अधिकार क्षेत्र में निष्‍पादित किया जाएगा।

आवेदक ऑनलाइन पंजीकरण से पूर्व स्वास्थ्य और फिटनेस की स्थिति का निर्धारण करने के लिए कुछ बुनियादी मेडिकल परीक्षण कर सकते है। यद्यपि, यह दिल्ली में DHLI और ITBP द्वारा यात्रा से पहले आयोजित मेडिकल परीक्षण के लिए मान्य नहीं होगा ।

आवेदन ऑनलाइन ही प्रस्तुत किया जाता है।